तंगी रफ़ीक़-ए-रह थी अदम या वजूद था
मेरा सफ़र ब-ताला-ए-चश्म-ए-हसूद था
“Hardship my road's companion, in existence or in naught,My journey by an envious eye's destiny was wrought.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरा रास्ता हमेशा कठिनाइयों से भरा रहा, चाहे मैं अस्तित्व में था या नहीं। मेरा सफ़र किसी ईर्ष्यालु आँख की तक़दीर के अधीन था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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