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आलम तिलिस्म-ए-शहर-ए-ख़मोशी है सर-बसर
या मैं ग़रीब-ए-किश्वर-ए-गुफ़्त-ओ-शुनूद था

The world is entirely a magic city of silence,Or was I a stranger in the land of speech and hearing?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

यह दुनिया पूरी तरह से खामोशी का जादुई शहर है, या शायद मैं ही बोलने और सुनने की भूमि में एक अजनबी था।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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