'ग़ालिब' कुछ अपनी स'ई से लहना नहीं मुझे
ख़िर्मन जले अगर न मलख़ खाए किश्त को
“O Ghalib, no gain from my own toil I see,The harvest would burn, though no locusts free To eat the crop.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
गालिब कहते हैं कि मुझे अपने प्रयासों से कुछ नहीं मिलेगा। अगर टिड्डियां फसल को न भी खाएं, तब भी खलिहान जल जाएगा।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
