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हुए हैं पाँव ही पहले नबर्द-ए-इश्क़ में ज़ख़्मी
न भागा जाए है मुझ से न ठहरा जाए है मुझ से

My feet were wounded first in love's battle,Now I can neither flee nor stand still.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

इश्क़ की जंग में मेरे पाँव पहले ही ज़ख़्मी हो गए हैं। इस कारण अब मैं न तो भाग सकता हूँ और न ही ठहर सकता हूँ।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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