रहे न जान तो क़ातिल को ख़ूँ-बहा दीजे
कटे ज़बान तो ख़ंजर को मर्हबा कहिए
“If life remains not, offer blood-money to the killer;If the tongue is severed, welcome the dagger.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यदि जान न रहे तो हत्यारे को ख़ून-बहा दीजिए; यदि ज़बान कट जाए तो ख़ंजर का स्वागत कीजिए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
