मस्जिद के ज़ेर-ए-साया ख़राबात चाहिए
भौं पास आँख क़िबला-ए-हाजात चाहिए
“Beneath the mosque's shade, let taverns now arise,The eye near the brow, our Qibla for all desires.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मस्जिद की छाँव के नीचे मयखाने चाहिएँ। भौंह के पास की आँख सभी इच्छाओं का क़िबला होनी चाहिए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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