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'असद' यास-ए-तमन्ना से न रख उम्मीद-ए-आज़ादी
गुदाज़-ए-आरज़ू-हा आब-यार-ए-आरज़ू-हा है

Asad, from the despair of yearning, expect no freedom; The very melting of desires is the temper of desires.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

असद, इच्छाओं की निराशा से आज़ादी की उम्मीद न रख, क्योंकि इच्छाओं का पिघलना ही उन्हें तराशता और दृढ़ करता है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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