वहशत-ए-ख़्वाब-ए-अदम शोर-ए-तमाशा है 'असद'
जो मज़ा जौहर नहीं आईना-ए-ताबीर का
“The terror of non-existence's dream, Asad, is a clamorous show,”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
असद, अभाव के स्वप्न का भय एक शोरगुल भरा तमाशा है; इसकी शोभा व्याख्या के दर्पण का वास्तविक सार नहीं है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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