क्यूँ न दुनिया को हो ख़ुशी 'ग़ालिब'
शाह-ए-दीं-दार ने शिफ़ा पाई
“Why shouldn't the world be joyful, Ghalib, The pious King has found his cure.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हे ग़ालिब, दुनिया क्यों न खुश हो, क्योंकि धर्मनिष्ठ राजा को शिफ़ा मिल गई है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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