Sukhan AI
रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो
हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो

Let me now go to such a place where there is no one,Where there's no one to converse with, and no one to share a language.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अब हमें ऐसी जगह जाकर रहना चाहिए जहाँ कोई न हो। जहाँ बातचीत करने वाला कोई न हो और हमारी ही ज़बान बोलने वाला भी कोई न हो।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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पाठ
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