सब रक़ीबों से हों ना-ख़ुश पर ज़नान-ए-मिस्र से
है ज़ुलेख़ा ख़ुश कि महव-ए-माह-ए-कनआँ हो गईं
“Though she's displeased with every rival's face, Zulaikha's glad for Egypt's women, who, in Joseph's grace, Lost themselves, absorbed in Canaan's moon's embrace.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जुलेखा सभी प्रतिद्वंद्वियों से नाखुश है, लेकिन मिस्र की महिलाओं से खुश है क्योंकि वे सभी 'कनान के चाँद' (यूसुफ) में लीन हो गईं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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