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जू-ए-ख़ूँ आँखों से बहने दो कि है शाम-ए-फ़िराक़
मैं ये समझूँगा कि शमएँ दो फ़रोज़ाँ हो गईं

Let streams of blood flow from my eyes, for it is the evening of separation;I will imagine that two candles have been lit.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अपनी आँखों से खून की धाराएँ बहने दो, क्योंकि यह जुदाई की रात है। मैं यह समझूँगा कि दो मोमबत्तियाँ जल गई हैं।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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