मैं भी माज़ूर-ए-जुनूँ हूँ 'असद' ऐ ख़ाना-ख़राब
पेशवा लेने मुझे घर से बयाबाँ निकला
“O Asad, I too am afflicted by madness, O wretched soul,The wilderness itself emerged from my house to lead me away.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ऐ असद, मैं भी जुनून (पागलपन) से लाचार हूँ, ऐ बर्बाद हाल व्यक्ति। मुझे अगुवाई के लिए लेने (अपने साथ ले जाने) के लिए जंगल खुद मेरे घर से बाहर निकला।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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