'आलम-ए-बे-सर-ओ-सामानी-ए-फ़ुर्सत मत पूछ
लंगर-ए-वहशत-ए-मजनूँ है बयाबाँ मेरा
“Do not ask of the desolate state of my leisure;My wilderness is the anchor of Majnun's wild despair.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरी फ़ुर्सत की बे-सर-ओ-सामानी (विरान अवस्था) के बारे में मत पूछो। मेरा बयाबाँ (रेगिस्तान) मजनूँ की वहशत (दीवानगी) का लंगर (ठहराव) है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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