फ़हम ज़ंजीरी-ए-बे-रब्ती-ए-दिल है या-रब
किस ज़बाँ में है लक़ब ख़्वाब-ए-परेशाँ मेरा
“Is reason bound by heart's disarray, O Lord?In what tongue does my troubled dream find its name?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हे प्रभु, क्या समझ दिल की अव्यवस्था में जकड़ी हुई है? मेरे परेशान सपने का नाम किस भाषा में है?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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