ख़ुशा इक़बाल-ए-रंजूरी 'अयादत को तुम आए हो
फ़रोग-ए-शम-ए-बालीं ताले'-ए-बेदार-ए-बिस्तर है
“Oh, what fortune for my ailment, that you have come to visit!The lamp's glow by my head, the awakened destiny of my bed.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरी बीमारी का क्या सौभाग्य है कि तुम मेरी ख़बर लेने आए हो। मेरे सिरहाने जलती शमा की रौशनी मेरे बिस्तर के जागृत भाग्य जैसी है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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