ब-ज़ौक़-ए-शोख़ी-ए-आ'ज़ा तकल्लुफ़ बार-ए-बिस्तर है
मु'आफ़-ए-पेच-ओ-ताब-ए-कशमकश हर तार-ए-बिस्तर है
“With limbs alive with playful zest, the bed feels like a formal weight; From restless twists and inner test, each thread escapes that struggling state.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जब अंगों में चंचलता का आनंद हो, तो बिस्तर का तकल्लुफ़ एक बोझ लगता है। बिस्तर का हर धागा संघर्ष के पेच-ओ-ताब से मुक्त है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
