उग रहा है दर-ओ-दीवार पे सब्ज़ा 'ग़ालिब'
हम बयाबाँ में हैं और घर में बहार आई है
“Greenery sprouts on doors and walls, O Ghalib!I am in the wilderness, and spring has come to my home.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
दरवाज़ों और दीवारों पर घास उग रही है, ग़ालिब। मैं जंगल में हूँ और मेरे घर में बहार आ गई है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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