फ़ुर्सत-ए-आईना-ए-सद-रंग-ए-ख़ुद-आराई है
रोज़-ओ-शब यक कफ़-ए-अफ़सोस-ए-तमाशाई है
“The mirror of self-adornment offers a hundred hues of leisure,Yet day and night are but a spectator's palmful of regret.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
स्वयं को सजाने-संवारने वाले सैकड़ों रंग के दर्पण में बहुत फ़ुर्सत है, परंतु दिन और रात केवल एक दर्शक के अफ़सोस की एक मुट्ठी भर ही रह जाते हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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