ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
“What kind of friendship is this, where friends turn to preach?Would that there were a healer, or one who shared my grief's reach.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यह कैसी दोस्ती है कि दोस्त उपदेशक बन गए हैं। कोई इलाज करने वाला होता, कोई दुःख बाँटने वाला होता।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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