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इसी कौकब की ताबानी से है तेरा जहाँ रौशन
ज़वाल-ए-आदम-ए-ख़ाकी ज़ियाँ तेरा है या मेरा

By the radiance of this cosmic source, your world is lit, Is the brilliance of humanity's dust yours, or is it mine?

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

इस नभ के प्रकाश से तेरा संसार प्रकाशित है। क्या मानव जाति की चमक तुम्हारी है या मेरी?

विस्तार

यह शेर, जो अल्लामा इकबाल साहब का है, अस्तित्व के स्रोत पर बात करता है। शायर कहते हैं कि यह दुनिया तो चाँद की रोशनी से जगमगाती है, लेकिन फिर वो यह सवाल करते हैं कि इंसान की ये ज़मीनी ज़िन्दगी, ये चमक.... क्या ये रब का दिया है, या सिर्फ मेरा अपना एहसास है? यह एक गहरा फ़लसफ़ा है जो मालिक और बन्दे के रिश्ते को छूता है।

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