मोहम्मद भी तिरा जिबरील भी क़ुरआन भी तेरा
मगर ये हर्फ़-ए-शीरीं तर्जुमाँ तेरा है या मेरा
“Whether it is Muhammad, or Gabriel, or the Quran, it is yours; but this sweet letter—is it your translation, or is it mine?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मोहम्मद भी तेरा है, जिब्रील भी तेरा है, और क़ुरआन भी तेरा है; लेकिन यह मीठा अक्षर—क्या इसका अनुवाद तेरा है या मेरा?
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि यह रूह की बात है। शायर यहाँ कहते हैं कि अल्लाह के दिए हुए सब कुछ—नबी, कुरआन—तो पाक है, वो तो आपका है। लेकिन जब हम उस पाकियत को अपनी शायरी के ज़रिए, अपने लफ़्ज़ों में उतारते हैं, तो ये जो कला है न... ये किसका है? क्या ये इल्हाम आपका है, या बस मेरे दिल का हाल?
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