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वो शय कुछ और है कहते हैं जान-ए-पाक जिसे
ये रंग ओ नम ये लहू आब ओ नाँ की है बेशी

It is something else, they say, O beloved one, for which these colors, this dampness, this blood, water, and the stain are excessive.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

वो चीज़ कुछ और है, कहते हैं जान-ए-पाक जिसे; ये रंग और नम ये लहू, आब और नाँ की है बेशी।

विस्तार

यह शेर हमें जीवन की सच्चाई और भ्रम (illusion) के बारे में बताता है। जान-ए-पाक कहते हैं कि यह दुनिया, ये रंग, ये पानी, ये रोटी... ये सब कुछ केवल एक दिखावा है। शायर हमें समझाते हैं कि असली हकीकत कहीं और है, जो हमारी इंद्रियों से परे है। यह एक गहरा दार्शनिक संदेश है, जो हमें आत्म-खोज की ओर प्रेरित करता है।

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