अरिनी मैं भी कह रहा हूँ मगर
ये हदीस-ए-कलीम-ओ-तूर नहीं
“Arini, I too am saying, but this is not the Hadith of the Word and the Mountain.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
अरिनी, मैं भी कह रहा हूँ, पर यह (बात) कलीम और तूर की हदीस नहीं है।
विस्तार
यह शेर हमें एक बहुत गहरे फ़र्क़ के बारे में बताता है। शायर कह रहे हैं कि दुनिया में बहुत बातें होती हैं, बहुत दावे होते हैं, लेकिन ये जो हम सिर्फ़ ज़ुबान से कहते हैं, ये वो हक़ीक़त नहीं है जो क़लम और नूर से निकलती है। शायर हमें हमेशा याद दिलाते हैं कि असली ज्ञान और सच्चाई.... वो सिर्फ़ कहने से नहीं मिलती!
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