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हर गुहर ने सदफ़ को तोड़ दिया
तू ही आमादा-ए-ज़ुहूर नहीं

Every secret has broken the shell, You alone are not the arrival of the dawn.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

हर रत्न ने सीप को तोड़ दिया है, लेकिन तुम ही सुबह के आगमन नहीं हो।

विस्तार

यह शेर आत्म-साक्षात्कार की मुश्किल को समझाता है। यहाँ 'सदफ़' स्वयं (self) है, और 'गुहर' वो अनुभव हैं जो जीवन हमें देते हैं। शायर कहते हैं कि हर अनुभव ने हमें तो बदल दिया, लेकिन हमारा सच्चा स्वरूप, हमारा 'ज़ुहूर', अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। यह पूरी प्रक्रिया की गहराई को दिखाता है।

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