तू ज़मीर-ए-आसमाँ से अभी आश्ना नहीं है
नहीं बे-क़रार करता तुझे ग़म्ज़ा-ए-सितारा
“You are not yet familiar with the conscience of the sky; / Do not make you restless with the sorrow of a star.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
तुम अभी आकाश की चेतना से परिचित नहीं हो; तुमको तारे के दुःख से बेचैन मत करो।
विस्तार
यह शेर आत्मिक परिपक्वता और वैराग्य की बात करता है। अल्लामा इकबाल कहते हैं कि जीवन की सच्ची समझ, जो आसमान की ज़मीर है, आप अभी नहीं जान पाए हैं। उनका इशारा है कि दुनिया की चमक-दमक, जैसे तारों की टिमटिमाहट, उस दिल को बेचैन नहीं कर सकती जो अंदर से शांत और संतुष्ट हो। यह हमें बताता है कि असली सुकून बाहर नहीं, बल्कि अपने भीतर की विशालता में है।
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