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तिरे नीस्ताँ में डाला मिरे नग़मा-ए-सहर ने
मिरी ख़ाक पै-सिपर में जो निहाँ था इक शरारा

In the darkness of the night, my song of dawn cast its spell, And from the secret hidden beneath my ashes, a flash of brilliance fell.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मेरे सवेरे का गीत (नग़मा-ए-सहर) तुम्हारे अंधेरे में पड़ गया, और मेरी राख पर दफ़न जो शरारत/चमक छिपी थी, वह बाहर आ गई।

विस्तार

यह शेर बहुत गहरा है, जो इश्क़ और आत्म-खोज की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि भले ही उन्होंने अपना सबसे प्यारा 'सुबह का नग़मा' महबूब की गली में बिखेर दिया... लेकिन जो असली चिंगारी थी, जो जुनून था, वह कहीं बाहर नहीं था। वह तो उनकी अपनी 'ख़ाक' (धूल) के नीचे छिपा हुआ था। यह हमें सिखाता है कि सबसे बड़ी आग बाहर नहीं, बल्कि भीतर ही जलती है।

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