वो ख़ाक कि परवा-ए-नशेमन नहीं रखती
चुनती नहीं पहना-ए-चमन से ख़स ओ ख़ाशाक
“She does not care for the dust of the sitting mat, Nor does she choose the fragrant grass from the garden's spread.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
वो धूल की परवाह न करती बैठने की जगह की, न चुनती है बगीचे के फैलाव से खुशबूदार घास को।
विस्तार
यह शेर बताता है कि दुनिया की नश्वर चीज़ें, या वास्तविकता, इंसानी दिखावे से कितनी दूर है। शायर कहते हैं कि धूल को किसी महफ़िल की परवाह नहीं, किसी सजावट या नक्काशी की ज़रूरत नहीं। यह जंगल से बने कपड़ों को चुनती नहीं, मतलब जीवन की असली सच्चाई किसी भी श्रृंगार या दिखावे से ऊपर होती है।
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