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ग़ज़ल

है याद मुझे नुक्ता-ए-सलमान-ए-ख़ुश-आहंग

है याद मुझे नुक्ता-ए-सलमान-ए-ख़ुश-आहंग

यह ग़ज़ल बताती है कि यादों की महत्ता किसी भी व्यक्ति या परिस्थिति के लिए नहीं होती। यह जीवन में वास्तविक ज्ञान और खुशी को अपनाने पर जोर देती है, न कि केवल दिखावे या नकल पर। कवि कहता है कि असली जीवन जीने के लिए साहस और समझ की ज़रूरत है।

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1
है याद मुझे नुक्ता-ए-सलमान-ए-ख़ुश-आहंग दुनिया नहीं मर्दान-ए-जफ़ा-कश के लिए तंग
मुझे सलमान की प्यारी याद याद है, दुनिया उन लोगों के लिए तंग नहीं है जो बेवफा होते हैं।
2
चीते का जिगर चाहिए शाहीं का तजस्सुस जी सकते हैं बे-रौशनी-ए-दानिश-ओ-फ़रहंग
चीते का साहस और शाही का तेज चाहिए, बस इतना है कि आप ज्ञान और गौरव की रोशनी के बिना भी जी सकते हैं।
3
कर बुलबुल-ओ-ताऊस की तक़लीद से तौबा बुलबुल फ़क़त आवाज़ है ताऊस फ़क़त रंग
बुलबुल और मोर की नकल करने से तौबा करो; बुलबुल केवल आवाज़ है और मोर केवल रंग।
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