इलाज-ए-ज़ोफ़-ए-यक़ीं इन से हो नहीं सकता
ग़रीब अगरचे हैं 'राज़ी' के नुक्ता-हाए-दक़ीक़
“The cure for the wound of certainty cannot come from these; even if 'Raazi' possesses the dot-details.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
यक़ीन के ज़ख़्म का इलाज इन चीज़ों से नहीं हो सकता; भले ही 'राज़ी' के नुक्ता-हाए-दक़ीक़ (बारीक बिंदु) हों।
विस्तार
यह शेर बताता है कि सिर्फ़ तर्कों या ज्ञान से किसी चीज़ की कमज़ोरी को ठीक नहीं किया जा सकता। शायर कहते हैं कि यक़ीन की कमज़ोरी का इलाज.... न तो नुक्ता-नुक्ता तर्कों से होगा, और न ही किसी की बारीकी से बात करने से। कभी-कभी, कुछ चीज़ें सिर्फ़ दिल से, रूह से ही समझी जा सकती हैं।
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