अफ़्ग़ानियों की ग़ैरत-ए-दीं का है ये ‘इलाज
मुल्ला को उन के कोह-ओ-दमन से निकाल दो
“This is the pride of the Afghan faith, O 'Ilaj' / Remove the Mullah from their mountains and valleys.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
यह अफ़ग़ानियों की धार्मिक शान की बात है, ऐ 'इलाज'। मुल्ला को उनके पहाड़ों और घाटियों से दूर कर दो।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ कविता नहीं है, यह एक गहरा सामाजिक तंज़ है। शायर साहब यहाँ इशारा कर रहे हैं कि किसी भी समुदाय की धार्मिक भावना, उसका जोश, कहाँ से आता है। उनका कहना है कि अगर उस धार्मिक जोश का ‘इलाज’ करना है, तो उस जोश को बनाए रखने वाले लोगों (मौलवी या मुल्ला) की जड़ से पहचान करनी होगी। यह एक चिंतन है कि समाज की नींव कहाँ टिकी है।
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