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अहल-ए-हरम से उन की रिवायात छीन लो
आहू को मर्ग़-ज़ार-ए-ख़ुतन से निकाल दो

From the women of the household, take away their tales, And from the garden of the virgin's death, remove the sound.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

अहल-ए-हरम से उन की रिवायात छीन लो, और आहू को मर्ग़-ज़ार-ए-ख़ुतन से निकाल दो।

विस्तार

यह शेर हमें रूढ़ियों और दिखावे के धर्म से दूर रहने का संदेश देता है। शायर कहते हैं कि हमें पवित्र स्थानों पर की जाने वाली सिर्फ़ रस्मों ('रिवायत') को छोड़ देना चाहिए। 'आहू को मर्ग़़-ज़ार-ए-ख़ुतन से निकाल दो' का मतलब है कि हमें अपने अंदर की आत्मा को उन बेमानी और पुरानी बंदिशों से आज़ाद करना होगा। यह एक आत्मिक क्रांति का आह्वान है!

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