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अब न वो प्रेम में वो गर्मजोशी बची, न सौंदर्य में पहले जैसी चमक
अब न ग़ज़नवी में वो तड़प रही, न अयाज़ की ज़ुल्फ़ों में वो पहले जैसे फन्दे

Now that warmth in love is gone, nor the shine of beauty as before; now that yearning in Ghaznavi is absent, nor the magic in Ayaz's tresses as before.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

अब न प्रेम में वह गर्मजोशी बची, न सौंदर्य में पहले जैसी चमक; अब न ग़ज़नवी में वह तड़प रही, न अयाज़ की ज़ुल्फ़ों में वह पहले जैसे फ़न्दे।

विस्तार

यह शेर हमें ज़िंदगी के एक बहुत गहरे सच से रूबरू कराता है। शायर कह रहे हैं कि समय के साथ सब कुछ फीका पड़ जाता है। न प्यार में वो पहली वाली गरमाहट बची है, और न ही सुंदरता में वो पुरानी चमक। ये एक तरह का विरह है... कि जो चीज़ें पहले इतनी ज़बरदस्त थीं, अब उनमें वो जान नहीं रही। यह हमें सिखाता है कि हर चीज़ को संभालकर जीना चाहिए।

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पाठ
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