तरब-आशना-ए-ख़रोश हो तू नवा है महरम-ए-गोश हो
वो सरोद क्या कि छुपा हुआ हो सुकूत-ए-पर्दा-ए-साज़ में
“Oh, be a companion of sorrow, you are the intimate of my heart; / Tell me, what is that melody hidden in the silence of the curtained instrument?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
हे दुःख का साथी बनो, तू मेरे हृदय का अंतरंग है; वो सरोद क्या है जो साज के परदे की खामोशी में छिपा है।
विस्तार
यह शेर एक गहरे और नज़दीकी रिश्ते की बात करता है। शायर महबूब को संबोधित करते हुए कहते हैं कि आपका साथ कितना गहरा है। दूसरी पंक्ति एक खूबसूरत तशबीह है—वह कौन-सी धुन है जो वाद्य यंत्र के पर्दे की खामोशी में छिपी है? इसका मतलब है कि सबसे मधुर और गहरी भावनाएं हमेशा शोरगुल में नहीं होतीं; वे अक्सर उस खामोशी में होती हैं, जहाँ हमें बस सुनने की ज़रूरत होती है!
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