तू बचा बचा के न रख इसे तिरा आइना है वो आइना
कि शिकस्ता हो तो अज़ीज़-तर है निगाह-ए-आइना-साज़ में
“Don't protect it too much, for it is your mirror; that mirror, if it breaks, is dearer than the gaze of the mirror-maker.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
तू इस तरह बचाकर न रख, ये तेरा आइना है। वो आइना कि टूटे तो, आइना बनाने वाले की नज़रों से ज़्यादा प्यारा है।
विस्तार
देखिए, यह शेर हमें एक बहुत गहरा फ़लसफ़ा समझाता है। शायर कहते हैं कि आप अपने आप को इतना बचाकर मत रखना, क्योंकि जो चीज़ टूटी हुई होती है, वह ज़्यादा क़ीमती होती है। यह बात सिर्फ़ आइने की नहीं है, यह हमारे दिल और ज़िन्दगी की सच्चाई है! हमें अपनी कमियों को भी स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि वही हमें असली इंसान बनाती हैं।
