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न बादा है न सुराही न दौर-ए-पैमाना
फ़क़त निगाह से रंगीं है बज़्म-ए-जानाना

Neither is it a flask, nor a pitcher, nor a measure of wine, Only the glance has colored the gathering of women.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

न शराब की बोतल है, न जग है, न शराब मापने का पात्र; केवल नज़र ने ही महिलाओं के मिलन को रंग दिया है।

विस्तार

यह शेर बताता है कि किसी भी महफ़िल की रौनक किसी भौतिक चीज़ से नहीं आती। शायर कहते हैं कि चाहे न शराब हो, न सुराही हो, न कोई महँगा पैमाना... इस पूरी महफ़िल को रंगीन बनाने वाली चीज़ सिर्फ़ एक नज़र है। यह इश्क़ की उस सच्चाई को बयान करता है जहाँ दिल की नज़रों का जादू हर चीज़ से ज़्यादा क़ीमती होता है।

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