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ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं
तू आबजू इसे समझा अगर तो चारा नहीं

The self is an ocean that has no shore, If you mistake it for mere water, there is no cure.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

खुदी वो समंदर है जिसका कोई किनारा नहीं, अगर तू इसे बस पानी समझ गया तो इसका कोई इलाज नहीं।

विस्तार

यह शेर, जो अल्लामा इकबाल साहब ने कहा है, इंसान की अपनी पहचान और उसकी असीमित क्षमता पर बात करता है। 'बहर' यानी सागर, हमारे अंदर की वो विशालता है, जिसकी कोई सीमा नहीं। अगर हम इस विशाल आत्मा को सिर्फ एक छोटे तालाब (आबजू) मान लें, तो हम अपनी असलियत को ही नकार देंगे। यह शेर हमें खुद को बड़ा समझने की सीख देता है।

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