तिलिस्म-ए-गुंबद-ए-गर्दूं को तोड़ सकते हैं
ज़ुजाज की ये इमारत है संग-ए-ख़ारा नहीं
“The spell of the dusty dome, they can break it, For this structure of Zujaj is not stone of pure quartz.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
तिलिस्म-ए-गुंबद-ए-गर्दूं को तोड़ा जा सकता है, क्योंकि ज़ुजाज की यह इमारत शुद्ध क्वार्ट्ज के पत्थर से नहीं बनी है।
विस्तार
यह शेर हमें सिखाता है कि दिखावा और हकीकत में कितना बड़ा फ़र्क होता है। शायर कहते हैं कि किसी भी झूठी शान या दिखावे का गुंबद.... सिर्फ़ एक भ्रम है, जिसे तोड़ा जा सकता है। असली इमारत तो पत्थरों की नहीं, बल्कि मेहनत और इरादों की बनी होती है। यह शेर हमें आत्म-निर्भरता का गहरा संदेश देता है।
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