मंज़िल-ए-राह-रवाँ दूर भी दुश्वार भी है
कोई इस क़ाफ़िले में क़ाफ़िला-सालार भी है
“The destination, the path, whether far or difficult, is there; / Someone in this caravan is also a leader of caravans.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
राह की मंजिल, चाहे वह दूर हो या कठिन, निश्चित रूप से है; इस कारवां में कोई ऐसा भी है जो स्वयं एक कारवां का नेतृत्व करने वाला है।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी के सफ़र को समझाता है। अल्लामा इकबाल कहते हैं कि मंज़िल दूर है, और राह भी आसान नहीं है। लेकिन ये सिर्फ़ एक चेतावनी नहीं है... ये एक उम्मीद है। शायर हमें बताते हैं कि चाहे रास्ता कितना भी मुश्किल क्यों न हो, इस क़ाफ़िले में एक क़ाफ़िला-सालार भी मौजूद है। यानी, हमें भटकने की ज़रूरत नहीं, मार्गदर्शन ज़रूर मिलेगा।
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