इल्म की हद से परे बंदा-ए-मोमिन के लिए
लज़्ज़त-ए-शौक़ भी है नेमत-ए-दीदार भी है
“For the man of faith, beyond the limits of knowledge, Both the sweetness of longing and the favor of seeing are blessings.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
ज्ञान की सीमा से परे, एक मोमिन (आस्थावान) के लिए, प्रेम की मिठास भी एक कृपा है और दर्शन का सौभाग्य भी एक वरदान है।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ ज्ञान की बात नहीं करता, बल्कि दिल की बात करता है। शायर समझाते हैं कि एक सच्चे मोमिन के लिए, दो चीज़ें इतनी क़ीमती हैं कि उनका अंदाज़ा बस दिल ही लगा सकता है। एक है 'शौक़' की मिठास, और दूसरी है 'दीदार' का सुकून। यह एहसास बताता है कि रूह का सफ़र किताबों से परे होता है।
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