मता-ए-बे-बहा है दर्द-ओ-सोज़-ए-आरज़ूमंदी
मक़ाम-ए-बंदगी दे कर न लूँ शान-ए-ख़ुदावंदी
“The pain and agony of yearning for your favor is priceless; I would rather not have the station of divine grace than the status of servitude.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
तुम्हारे उपकार की लालसा में यह दर्द और पीड़ा अमूल्य है; मैं बन्दगी का स्थान पाकर भी ख़ुदावंदी की शान नहीं लेना चाहूँगा।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी के दो बड़े विरोधाभासों को दिखाता है। शायर कह रहे हैं कि दुनियावी नशा और दर्द... जो दिल में होता है, वो इतना कीमती है कि उसे किसी भी झूठे या कमज़ोर मक़ाम के बदले नहीं दिया जा सकता। यह सिर्फ़ एक दर्जा नहीं है, बल्कि आत्मा की आज़ादी की बात है। शायर अपनी सच्चाई और अपने जुनून को किसी भी दिखावे की शान से ऊपर मानते हैं। यह विद्रोह है... अपनी हक़ीक़त के लिए!
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