बादा-गर्दान-ए-अजम वो अरबी मेरी शराब
मिरे साग़र से झिजकते हैं मय-आशाम अभी
“The cup of the poison-giver, the cup of the poison-drinker, and my Arabic wine, My comrades still hesitate before the intoxicating evening.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
बादा-गर्दान-ए-अजम वो अरबी मेरी शराब, मेरे साग़र से झिजकते हैं मय-आशाम अभी। (अर्थ: वे ज़हर देने वाले का प्याला, ज़हर पीने वाले का प्याला, और मेरी अरबी शराब—मेरे साक़रों से अभी भी मदहोश शाम (यानी महफ़िल) के आगे हिचकते हैं।)
विस्तार
यह शेर उस गहरे नशा और उस कला की बात करता है जो बहुत असरदार होती है। शायर कहते हैं कि मेरा नशा (मेरी शायरी) इतना गहरा है कि लोग मेरे महफ़िल में आने से डरते हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात क्या है? कि असली मदहोशी, असली मय-आशाम, अभी बाकी है! यह शेर बताता है कि सबसे खूबसूरत पल हमेशा इंतज़ार में होता है।
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