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किसे नहीं है तमन्ना-ए-सरवरी लेकिन
ख़ुदी की मौत हो जिस में वो सरवरी क्या है

For whom is the desire of the twilight hour, when If in the death of the self, what is that twilight hour?

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

किसी को सरवरी (गोधूलि) की तमन्ना नहीं है, बल्कि अगर खुद की मौत हो, तो उसमें वह सरवरी क्या है।

विस्तार

यह शेर इस बात पर गहरा सवाल उठाता है कि क्या कोई भी इच्छा, क्या कोई भी खुशी, हमारे 'ख़ुदी' (स्वयं की पहचान) की कीमत पर आ सकती है? शायर कहते हैं कि हर किसी को 'सरवरी' की तमन्ना तो है, लेकिन अगर उस तमन्ना में अपनी पहचान को खोना पड़े... तो वो खुशी, वो खूबसूरती किस काम की! यह आत्म-सम्मान का संदेश है।

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