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क़नाअत न कर आलम-ए-रंग-ओ-बू पर
चमन और भी आशियाँ और भी हैं

Do not be content with the world of color and scent, There are other gardens and other abodes.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

रंग-ओ-बू की दुनिया से संतुष्ट मत हो, और भी बाग़ और और भी ठिकाने हैं।

विस्तार

यह शेर हमें कभी भी किसी चीज़ पर क़नाअत न करने की सीख देता है। अल्लामा इकबाल जी कहते हैं कि इस दुनिया की सुंदरता और खुशबू पर संतुष्ट मत हो जाना। क्योंकि यह आलम-ए-रंग-ओ-बू बहुत बड़ा है, और इसमें कई और बाग़ हैं, कई और ठिकाने हैं। हमें हमेशा उम्मीद रखनी चाहिए, क्योंकि जीवन का सौंदर्य इससे कहीं ज़्यादा है।

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