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अगर खो गया इक नशेमन तो क्या ग़म
मक़ामात-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ और भी हैं

If a lover's sigh is lost to sorrow, what grief, / For chambers of sighs and lamentations are many more.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

यदि एक प्रिय का नशा (या प्रेम) खो जाए, तो क्या दुःख है; क्योंकि आहों और विलाप के कक्ष और भी बहुत हैं।

विस्तार

ये शेर.... सिर्फ़ एक ग़म नहीं, बल्कि एक ज़िंदगी का फ़लसफ़ा है। शायर हमें समझा रहे हैं कि अगर ज़िंदगी से कोई एक ख़ूबसूरत पल, एक नशा.... खो भी जाए, तो ग़म क्यों? क्योंकि एहसास और जज़्बात के मक़ाम तो बहुत हैं। हर आह, हर फ़ुग़ाँ... एक नया मंज़र है। यह शेर हमें सिखाता है कि ज़िंदगी में ख़ुशी और ग़म... दोनों ही अपनी जगह पूरे हैं।

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