ये बुतान-ए-अस्र-ए-हाज़िर कि बने हैं मदरसे में
न अदा-ए-काफ़िराना न तराश-ए-आज़राना
“These academies of the present age, established in the madrasas, Show neither the style of the pagans nor the polish of the aristocrats.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
ये आज के ज़माने के बुतान (शैक्षणिक संस्थान) हैं जो मदरसों में बने हैं, न इसमें काफ़िराना अदा है और न ही आज़राना तर्ज़।
विस्तार
यह शेर हमें समय की नब्ज पहचानने को कहता है। शायर कहते हैं कि आज के दौर में जो शिक्षा दी जा रही है, वह किसी सच्चे मदरसे जैसी नहीं है। यह न तो विश्वासियों वाली शालीनता सिखाती है, और न ही मोहब्बत की असली कला। यह एक गहरा तंज़ है, कि ज्ञान अब केवल रस्मों तक सीमित हो गया है।
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