रग-ए-ताक मुंतज़िर है तिरी बारिश-ए-करम की
कि अजम के मय-कदों में न रही मय-ए-मुग़ाना
“The vein of my heart awaits your rain of grace, For in the cups of intoxication, the wine of the minstrel is gone.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मेरे दिल की नस तुम्हारे कृपा के वर्षा की प्रतीक्षा कर रही है, क्योंकि अजब के मदिरा पात्रों में गायक का मदिरा समाप्त हो गया है।
विस्तार
यह शेर गहरे और बेबस इंतज़ार को बयां करता है। शायर कहते हैं कि उनके दिल की नस-नस आपकी मेहरबानी की बारिश का इंतज़ार कर रही है। उन्हें महसूस होता है कि जब वो शराब (अजम) के जाम पीते भी हैं, तो उनमें वो नशा या जोश (मय-ए-मुग़ाना) नहीं बचा है जो पहले था। यह एक तरह से महबूब या रज़ा की मिन्नत है, कि दुनियावी चीज़ों से अब सुकून नहीं मिलता।
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