हयात क्या है ख़याल ओ नज़र की मजज़ूबी
ख़ुदी की मौत है अँदेशा-हा-ए-गूना-गूँ
“What is life, O thought, or the intensity of the gaze? It is the death of the self, a suspicion of sin.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
हे ख़याल, जीवन क्या है और नज़रों की मज़बूती क्या है? यह स्वयं का मर जाना है, पाप का संदेह है।
विस्तार
इस शेर में, शायर ने जीवन के अर्थ पर एक गहरा सवाल उठाया है। वे पूछते हैं कि क्या जीवन सिर्फ़ विचारों (ख़याल) या किसी की निगाह की तीव्रता (नज़र की मजज़ूबी) है। शायर के अनुसार, ये सब कुछ असल में 'ख़ुदी' (स्वयं) की मृत्यु के संदेह से ज़्यादा कुछ नहीं है। यह एक ऐसा आत्म-विनाशकारी अहसास है जो हमें बार-बार गुनाह करने की ओर धकेलता है।
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