अजब मज़ा है मुझे लज़्ज़त-ए-ख़ुदी दे कर
वो चाहते हैं कि मैं अपने आप में न रहूँ
“What a strange delight it is, that they grant me the flavor of my own being, They wish for me to lose myself within myself.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मुझे अपने आप में खुद की मिठास का अजीब मज़ा आता है, पर वे चाहते हैं कि मैं अपने आप में भी न रहूँ।
विस्तार
यह शेर इश्क़ और आत्म-खोज के गहरे पहलू को छूता है। शायर, अल्लामा इकबाल, कहते हैं कि खुद की 'लज़्ज़त' (स्वाद) में एक अजीब सा मज़ा है। लेकिन यहाँ एक उलझन है—वो चाहते हैं कि आप अपने आप में न रहें। यानी, आप अपनी पहचान को त्याग दें, खुद को पूरी तरह से उस इश्क़ में झोंक दें। यह समर्पण और अस्तित्व के बीच का एक खूबसूरत विरोधाभास है।
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