Sukhan AI
हाज़िर हैं कलीसा में कबाब ओ मय-ए-गुलगूँ
मस्जिद में धरा क्या है ब-जुज़ मौइज़ा ओ पंद

In the church, there are kebabs and wine of the garden; In the mosque, what is there, besides sermons and books?

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

कलीसे में कबाब और बाग का मय है; मस्जिद में केवल उपदेश और किताब के सिवा क्या है।

विस्तार

यह शेर एक गहरा सामाजिक और आध्यात्मिक सवाल उठाता है। शायर, अल्लामा इकबाल, यहां दुनिया की महफ़िल और धर्म की सादगी का बहुत खूबसूरत तकाज़ा करते हैं। वह पूछते हैं कि जब दुनिया में कबाब और मय-ए-गुलगूँ जैसी चीज़ें मौजूद हैं, तो क्या किसी मस्जिद में केवल उपदेश और किताबों का ही सहारा बचा है? यह शेर हमें जीवन के सच्चे मूल्यों पर सोचने को मजबूर करता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.